Corona virus 1st life saving medicine | कोरोना वायरस की पहली दवा | corona virus ki phli medicine Dexamethsone - CORONA VIRUS 2020

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Thursday, June 18, 2020

Corona virus 1st life saving medicine | कोरोना वायरस की पहली दवा | corona virus ki phli medicine Dexamethsone

Corona virus 1st life saving medicine |कोरोना वायरस की पहली दवा |corona virus ki phli medicine Dexamethsonez

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ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च  द्वारा बताया जा रहा है कि दुनिया की पहली लाइफ सेविंग कोविड-19 ड्रग्स जो कि इलाज कर सकता है corona virus पर रिसर्च के द्वारा यह काफी प्रभावशाली साबित हुआ है और इसी ड्रग  का नाम है डेक्सामेथासोन (Dexamethsone) तो हम इसे जानने की कोशिश करते हैं आखिर यह ड्रग है क्या यह कैसे काम करता है और कौन सा ट्रायल किया गया था जिसकी वजह से विश्व का यह पहला covid-19 मेडिसिन  बन चुका है

कोनसी है कोरोना वायरस की पहली मेडिसिन ?konsi hai covid19 ki pahli medicine?

 इसके पहले भी काफी सारी मेडिसिन के नाम सुन चुकेहैंhydroxychloroquine रेमदेसीविर यह दोनों को क्यों पहला नहीं बताया गया और डेक्सामेथासोन को पहला ड्रग बताया गया है यह इन सब के बारे में हम जानेंगे कोरोनावायरस लाइव सेविंग मेडिसिन  जोकि डेक्सामेथासोन Dexamethsone है जो कि काफी सस्ता मिलता है काफी उपयोग  किया जाता है और इसको पहला मेडिसिन बताया जा रहा है

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किस ने की विश्वा की पहली डेक्सामेथासोन/Dexamethsone की खोज ?

विश्वा सोध  द्वारा और एक मेजर ब्रेक थ्रू काफी कारगर साबित हुआ है कोविड-19 पेशेंट के ऊपर यह जो पूरा ट्रायल चला है वर्ल्ड के सबसे अच्छे ट्रायल टेस्टिंग सेंटर में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा एक प्रोग्राम चलाया गया है जिसका नाम है रिकवरी इस का फुल फॉर्म है रेंडम इवोल्यूशन ऑफ कोविड-19 थेरेपी इसमें कोई नइ  मेडिसिन का  इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है यह पहले से ही एक्जिस्टिंग ड्रग है जो कि कोविड-19 पेशेंट को ठीक कर सकता है|

 सबसे पहले हम देख लेते हैं कि यह ट्रायल कैसा चल रहा है ?

 शोधकर्ताओ दवरा  करीब  2000 पेशेंट को डेक्सामेथासोन दिया गया जीने कोविड-19 हुआ है और उन्हें कंपेयर किया गया 4300 कोरोनावायरस ग्रसित लोगों से जिनको यह डेक्सामेथासोन  Dexamethsone  नहीं दिया गया और यह पूरे ट्रायल में यह पाया गया कि रिकवरी के अछि  रिजल्ट है जो लोग वेंटीलेटर पर चले गए थे उन्हें भी यह ड्रग दिया गया जो लोग वेंटिलेटर पर चले जाते हैं कोविड-19 की वजह से उनमें से 50 प्रतिशत  लोग ही ठीक हो पाते हैं लेकिन यह डेक्सामेथासोन  के देने के बाद वह भी पूरी तरह से रिकवर हो पाए है जो लोग वेंटिलेटर पर गए थे उनमें से एक तिहाई लोग जिन्हें यह मेडिसिन  दिया गया था वह ठीक हो पाए हैं और दूसरी तरफ जी ने सिर्फ ऑक्सीजन पर रखा गया था ना कि वेंटिलेटर पर उनमें से करीब 5 में से एक व्यक्ति ठीक हो पाया कुल मिलाकर अगर पूरा देखा जाए तो 8 लोगों में से जो वेंटिलेटर पर भेजे गए थे उनमें से एक व्यक्ति ठीक हो पा रहा है एक व्यक्ति की जान बचा सकता है यह Dexamethsone/डेक्सामेथासोन जिनको सिर्फ  ऑक्सीजन दिया जाता है उनमें से 25% में से एक परसेंट व्यक्ति की जान बचा सकता है यह मेडिसिन |  अब हम यह सोच रहे हैं कि यह तो काफी कम कारगर साबित हो रहा है

   लेकिन अगर हम इसका उपयोग  शुरुआती समय से इसका इस्तेमाल करते आते तो तकरीबन यूके ही में ही 5000 से ज्यादा लोगों की जान बचाने में हम कारगर सफल  हो पाते और अगर हम पूरे विश्व की मृतकों की संख्या की बात करें तो करीब  4.52  लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है अगर हम इस मेडिसिन  का पहले इस्तेमाल किए होते तो करीबन हम 50000 से 55000 लोगों की जान बचा पाते कुल मिलाकर इस पर देखने की जरूरत है क्योंकि कोई भी अभी तक कारगर मेडिसिन  सामने नहीं आया है इसलिए हम इसे असरदार मान सकते हैं भले यह बहुत कम लोगों की जान बचा पाता है क्योंकि पहली बार हम देख रहे हैं कि यह Dexamethsone/डेक्सामेथासोन  के इस्तेमाल से कोरोना वायरस ग्रसित  लोग ठीक  हो पा रहे हैं |

डेक्सामेथासोन/Dexamethsone का प्रयोग हम तब करते हैं जब हमारी शरीर  मैं किसी बाहरी तत्वों का जैसे कि बैक्टीरिया वायरस का प्रवेश हो जाता है तब हमारा इम्यून सिस्टम  इस विस्तार को रोक ने के लिए तरल पदार्थ स्रावित  करता है  जो कि उस बाहरी तत्वों से लड़े और हमें बचाता है जैसे कि सूजन को कम करने में ट्यूमर को कम करने में इसका इस्तेमाल किया जाता है और इसमें बताया जा रहा है कि जो अविकसित देश है जहां पर corona virus के बहुत ज्यादा केस हो चुके हैं वहां बहुत ही ज्यादा कारगर साबित होंगी |

 भारत में डेक्सामेथासोन/Dexamethsone  का काफी अच्छा उत्पादन होता है और यह काफी सस्ता भी है इसके प्रत्येक दोज का  खर्चा केवल 5 से 6 रुपए पर इंजेक्शन आता है इतना सस्ता है या इंजेक्शन और टेबलेट दोनों ही प्रकार  में आता है जिन लोगों को जरूरत होती है डॉक्टर की निगरानी में दिया जाता है 10 दिन तक इस का इलाज चलता है जो चिकित्सक  कर सकते हैं जो मरीज है वह काफी तेजी से ठीक हो सकता है इस का मतलब यह नहीं की कोरोनावायरस के साधारण लक्षण में हम मेडिसिन का उपयोग कर ले डब्ल्यूएचओ की तरफ से भी एक गाइडलाइन आई है जिसमें अगर किसी को साधारण लक्छण हो  तो बिल्कुल भी उपयोगी  नहीं करना चाइये है जीने ज्यादा प्रॉब्लम है वही लोग यहां डॉक्टर की निगरानी में यहमेडिसिन का  इस्तेमाल करें डॉक्टर द्वारा का ट्रीटमेंट किया जाएगा जरूरी बात है कि अगर इस का गलत उपयोग किया गया तो हमारे सरीर पे इस का दुस परिणाम भी हो सकता है |

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हमे सतर्क रहना चाइये दुरी बनाये रखना की जरुरत  है तभी हम कोरोना से बच सकते है हमे भीड़ वाली जगह जाने से बचने  की जरुरत है बार बार हातो को धोना चाइये भीड़ वाली जगह पे मास्क /या मुँह और नक् को ढक के रखे |


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